तालाब किनारे बैठे, उन आँखों में कुछ सपने थे,
कुछ अपनौं के, कुछ अपने थे।
पर उन आँखों में तैरते सपनों को, पूरा करने के,
औज़ार कहाँ से लाऊँ।
सागर किनारे बैठे, लहरों को बनते देखा है,
पानी की छलछलाहट से, साज़ो को बनते देखा है।
इस ठहरे तालाब के पानी में, सैलाब कहाँ से लाऊँ,
दिल के तारों को जो छू ले, वो आवाज़ कहाँ से लाऊँ।
इसी झुंझुलाहट में, एक कंकर तालाब में मैंने फेंका,
कंकर के स्पर्ष से तालाब में, लहरों को बनते मैंने देखा।
जल तरंग के कोलाहल से, इस दिल को ये महसूस हुआ,
कि तालाब में सैलाब लाने को, कंकर भी चाँद, सूरज बन सकता है।
और ताज बनाने को, पत्थर भी संगमरमर बन सकता है।
चल पङा वो कंकर लिए, अपना ताज बनाने मैं।
इस दिशाहीन जीवन में, जो नयी राह नज़र आई है,
उस राह पर रुक जाने को, फिर से ठहराव कहाँ से लाऊँ,
और अपना ताज ना बनाने के, जज़बात कहाँ से लाऊँ।
In short.. To achieve success you several times look at the bigger picture and bigger things, but seldom ignore the small small items or ideas, that can lead you to tremendous success.. a thought shared by one of my good friend Chaitanya..
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